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खून से लाल हुआ काबुल: पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक में अस्पताल तबाह, 400 की मौत


आधी रात को बरसी आसमानी मौत

नई दिल्ली /  काबुल। अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में सोमवार की काली रात उस समय चीखों में बदल गई जब पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने एक बड़े अस्पताल को निशाना बनाया। इस भीषण हवाई हमले में सैकड़ों बेगुनाह लोगों के चीथड़े उड़ गए, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है।


तालिबान का पाकिस्तान पर सीधा प्रहार

तालिबान सरकार ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराया है। रिपोर्टों के अनुसार, यह हमला ओमिद नशा मुक्ति अस्पताल पर हुआ है, जहाँ भारी तबाही के बाद अब केवल लाशों का ढेर और मलबे का अंबार नज़र आ रहा है।


2000 बेड वाले अस्पताल में मची तबाही

बीबीसी पश्तो की रिपोर्ट के मुताबिक, इस 2000 बेड वाले अस्पताल में उस समय सैकड़ों मरीज़ मौजूद थे। अफ़ग़ान तालिबान के उप प्रवक्ता हमदुल्लाह फ़ितरात ने सोशल मीडिया पर इस हमले की पुष्टि करते हुए इसे मानवता के खिलाफ एक बड़ा अपराध करार दिया है।


मौत का आंकड़ा देख दहल जाएगी रूह

ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, इस हमले में अब तक लगभग 400 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 250 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं। राहत और बचाव दल मलबे से शवों को निकालने की जद्दोजहद कर रहे हैं, लेकिन मंज़र इतना खौफनाक है कि शवों की शिनाख्त करना मुश्किल हो रहा है।


पाकिस्तान का सफाई में अजीबोगरीब दावा

पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने अस्पताल को निशाना बनाने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। इस्लामाबाद का दावा है कि उनके लड़ाकू विमानों ने केवल काबुल और पूर्वी नंगरहार प्रांत में स्थित 'आतंकवादी ठिकानों' और सैन्य अड्डों को अपना निशाना बनाया था।


भारत ने बताया 'जनसंहार' और 'कायरता'

इस बीच, भारत ने इस बर्बरता पर कड़ा रुख अपनाते हुए हमले की तीव्र निंदा की है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इसे 'कायरतापूर्ण' और 'जनसंहार' की संज्ञा दी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है।


अंतरराष्ट्रीय कानूनों की उड़ी धज्जियां

अफ़ग़ानिस्तान की राष्ट्रीय सुलह परिषद के पूर्व प्रमुख अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने भी इस हमले पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने फ़ेसबुक पर लिखा कि पड़ोसी देश द्वारा इस तरह का हमला अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है और इसे किसी भी कीमत पर न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता।


धमाकों से थर्रा उठा पूरा काबुल शहर

स्थानीय लोगों के अनुसार, रात करीब 8:50 बजे काबुल का आसमान धमाकों की आवाज़ से थर्रा उठा था। अस्पताल के अंदर लगी आग इतनी भीषण थी कि दूर-दूर तक लपटें देखी गईं, और स्ट्रेचर पर दर्जनों शवों को बाहर ले जाते हुए देखा गया, जिससे हर तरफ कोहराम मच गया।


अस्पताल के पास नहीं था कोई सैन्य अड्डा

अफ़ग़ान स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता शराफ़त ज़मान अमरखेल ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल के पास कोई सैन्य ठिकाना नहीं था। यह हमला सीधे तौर पर उन लाचार मरीजों पर किया गया है जो अपनी नशे की लत छोड़कर नई ज़िंदगी की शुरुआत करने की कोशिश कर रहे थे।


सीमा पर बढ़ता तनाव और खूनी संघर्ष

पिछले कुछ हफ्तों से पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच सीमा पर तनाव चरम पर है। संयुक्त राष्ट्र (UN) के आंकड़ों के अनुसार, 26 फ़रवरी से अब तक सीमावर्ती झड़पों में 193 लोग घायल और 75 लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन यह ताज़ा हमला दोनों देशों को युद्ध की कगार पर ले आया है। फोटो सोर्से, साभार

विश्लेषण

"काबुल के अस्पताल पर हुआ यह हमला न केवल अफ़ग़ानिस्तान की संप्रभुता पर हमला है, बल्कि यह युद्ध के वैश्विक नियमों का भी घोर उल्लंघन है। पाकिस्तान द्वारा स्वास्थ्य सेवा केंद्र को निशाना बनाना उसकी हताशा को दर्शाता है। भारत का इस घटना को 'जनसंहार' कहना इस बात का संकेत है कि दक्षिण एशिया में सुरक्षा की स्थिति बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस नरसंहार पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए ताकि निर्दोष नागरिकों की बलि चढ़ना बंद हो सके।"
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