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अमेरिका के दोहरे मापदंडों पर ईरान का तीखा प्रहार: रूस-भारत तेल व्यापार पर व्हाइट हाउस की 'गुहार' ने बढ़ाया आक्रोश

नई दिल्ली | ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने रूसी तेल को लेकर अमेरिका के गिरगिटी व्यवहार की कड़ी भर्त्सना की है। प्रशासनिक गलियारों में हलचल उस वक्त तेज हो गई जब अराग़ची ने सोशल मीडिया पर यह खुलासा किया कि जो वाशिंगटन कल तक भारत पर रूसी तेल न खरीदने का दबाव बना रहा था, वही आज दुनिया के सामने हाथ फैलाकर तेल खरीदने की गुहार लगा रहा है। यह वैश्विक कूटनीति का सबसे शर्मनाक चेहरा है जहां महाशक्ति अपनी सुविधा के अनुसार अंतरराष्ट्रीय नियमों की धज्जियां उड़ा रही है और संप्रभु देशों को अपने मोहरे की तरह इस्तेमाल करना चाहती है।


वाशिंगटन के पाखंड की खुली पोल

पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है कि मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच व्हाइट हाउस ने अचानक अपनी नीतियों में यू-टर्न ले लिया है। प्रेस सेक्रेटरी कैरोलीन लेविट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी सुरक्षा टीम ने भारत को प्रतिबंधित रूसी तेल खरीदने की अस्थायी छूट दी है। हालांकि, अमेरिका इसे भारत का 'जिम्मेदार रवैया' बताकर ढंकने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वास्तविकता यह है कि यह निर्णय किसी नैतिकता पर नहीं, बल्कि अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर पैदा हुए डर और ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष की मज़बूरी का परिणाम है।

प्रतिबंधों की ढोंग और मज़बूरी का यू-टर्न

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अराग़ची ने अमेरिका के दोहरे चरित्र को उजागर करते हुए लिखा कि महीनों तक भारत को धमकाने वाला व्हाइट हाउस अब घुटनों पर आ गया है। उन्होंने साफ किया कि ईरान के साथ सिर्फ दो हफ़्तों के संघर्ष ने अमेरिका को उसकी कूटनीतिक सीमाओं का अहसास करा दिया है। आज अमेरिका की हताशा इतनी बढ़ गई है कि वह उन देशों से मदद की अपील कर रहा है जिन्हें वह कल तक अपनी प्रतिबंधों की लाठी से डराने की नाकाम कोशिश कर रहा था। यह वैश्विक मंच पर अमेरिका की गिरती साख का प्रमाण है।

अराग़ची का प्रहार: मज़बूरी में झुकता अमेरिका

ईरानी विदेश मंत्री ने यूरोपीय देशों की रीढ़विहीन राजनीति पर भी गहरा प्रहार करते हुए उन्हें अमेरिका का पिछलग्गू करार दिया है। अराग़ची के अनुसार, यूरोप ने ईरान के खिलाफ एक 'गैरकानूनी युद्ध' का समर्थन सिर्फ इसलिए किया क्योंकि उसे अमेरिका की चाटुकारिता में अपना स्वार्थ दिखाई दे रहा था। यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक चेतावनी है कि कैसे तथाकथित विकसित राष्ट्र अपनी संप्रभुता को अमेरिका के पास गिरवी रख चुके हैं और केवल अपने निजी हितों की पूर्ति के लिए युद्ध और प्रतिबंधों का खेल खेल रहे हैं।

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विश्लेषण:

यह अत्यंत खेदजनक है कि अमेरिका अपनी भू-राजनीतिक सुविधा के अनुसार अंतरराष्ट्रीय कानूनों को मोम की नाक की तरह मोड़ता रहता है। कल तक जो रूसी तेल 'अवैध' था, आज वह अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए 'आवश्यक' हो गया है। ईरान के साथ संघर्ष की आशंका मात्र से अमेरिका का सुर बदल जाना उसके खोखले सिद्धांतों को दर्शाता है। यह आक्रोश केवल ईरान का नहीं, बल्कि उन सभी देशों का होना चाहिए जिन्हें अमेरिका अपनी प्रतिबंधों की राजनीति से प्रताड़ित करता रहा है। समय आ गया है कि दुनिया इस 'डिप्लोमैटिक पाखंड' के खिलाफ एकजुट हो। #Geopolitics #USHypocrisy #OilPolitics #IranNews #AbbasAraghchi #RussiaOil #WhiteHouse #IndiaRussiaTrade #Geopolitics #OilWar
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