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बंगाल चुनाव: चुनाव आयोग सख्त, DGP हटाए गए,आचार संहिता लागू होते ही एक्‍शन में EC

चुनाव आयोग की बड़ी कार्रवाई

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही निर्वाचन आयोग पूरी तरह सक्रिय हो गया है। निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को उनके पद से हटा दिया है। यह कदम आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने के तुरंत बाद उठाया गया है। आयोग का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार के प्रशासनिक पक्षपात की संभावना को शून्य करना है।


नए पुलिस प्रमुख की नियुक्ति

मौजूदा DGP को हटाए जाने के बाद सीनियर IPS अधिकारी सिद्धनाथ गुप्ता को पश्चिम बंगाल का नया पुलिस प्रमुख नियुक्त किया गया है। चुनाव आयोग ने इस संबंध में राज्य सरकार को औपचारिक पत्र भेजकर तत्काल प्रभाव से निर्देशों का पालन करने को कहा है। सिद्धनाथ गुप्ता के कंधों पर अब राज्य की कानून-व्यवस्था को सुधारने और शांतिपूर्ण मतदान कराने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


दो चरणों में मतदान की रणनीति

आयोग ने इस बार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को केवल दो चरणों में कराने का एक साहसिक निर्णय लिया है। मतदान 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को संपन्न होगा, जबकि चुनाव परिणामों की घोषणा 4 मई को की जाएगी। आमतौर पर बंगाल में चुनाव कई चरणों में होते रहे हैं, लेकिन इस बार हिंसा रोकने के लिए रणनीति बदली गई है। आयोग का मानना है कि कम चरणों में चुनाव होने से उपद्रवी तत्वों को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जाकर उत्पात मचाने का अवसर नहीं मिलेगा।


हिंसा पर नकेल कसने की तैयारी

पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा का इतिहास काफी पुराना और चिंताजनक रहा है। पिछले पंचायत और विधानसभा चुनावों के दौरान हुई हिंसक घटनाओं को देखते हुए इस बार केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की योजना बनाई गई है। आयोग ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से पिछले चुनावों में हुई हिंसा की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है। इसमें उन क्षेत्रों और पुलिस अधिकारियों की पहचान की जा रही है, जहाँ सुरक्षा व्यवस्था में चूक हुई थी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।


प्रशासन को सख्त निर्देश

चुनाव आयोग ने 16 मार्च 2026 तक उन सभी पुलिस थाना स्तर के अधिकारियों की जानकारी मांगी है जिनके अधिकार क्षेत्र में पिछली चुनावी हिंसा हुई थी। आयोग का यह कदम प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा संदेश है। पारदर्शी चुनाव के लिए अर्धसैनिक बलों की कई कंपनियों को पहले ही राज्य के संवेदनशील इलाकों में तैनात करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अब पूरी मशीनरी का ध्यान केवल स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। फोटो सोर्स: साभार


विश्लेषण: निर्वाचन आयोग का यह निर्णय पश्चिम बंगाल में 'फ्री एंड फेयर' चुनाव कराने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। डीजीपी को बदलना और मतदान के चरणों को घटाना, दोनों ही रणनीतिक कदम हैं जो चुनावी हिंसा के पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए उठाए गए हैं। यह शासन व्यवस्था को निष्पक्ष बनाए रखने का कड़ा संदेश है। #WestBengalElection #ElectionCommission #BengalPolitics #DGPChange #SiddhanathGupta

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