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LPG संकट पर मोदी सरकार पर बरसे संजय सिंह: बोले- 'जनता को बेवकूफ समझना बंद करे सरकार'

नई दिल्ली:आम आदमी पार्टी (AAP) के कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने 17 मार्च 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। देश में गहराते एलपीजी (LPG) संकट को लेकर सिंह ने सरकार के दावों की धज्जियां उड़ाते हुए आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोग जमीनी हकीकत से पूरी तरह कट चुके हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ जनता गैस सिलेंडरों के लिए दर-दर भटक रही है, वहीं सरकार और उसके प्रवक्ता सब कुछ सामान्य होने का झूठा राग अलाप रहे हैं।

संजय सिंह ने देश के मौजूदा हालातों का जिक्र करते हुए कहा कि आज पूरे भारत में लोग गैस के लिए कई किलोमीटर लंबी कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं। उन्होंने दावा किया कि ब्लैक मार्केट में सिलेंडर की कीमतें आसमान छू रही हैं और एक सिलेंडर 1,500 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक में बिक रहा है। इस संकट का असर अब रसोई से निकलकर रोजगार तक पहुँच गया है, जिसके कारण देश के कई हिस्सों में होटल, हॉस्टल, पीजी और रेस्टोरेंट बंद होने के कगार पर हैं।


संसद में 57 हजार करोड़ का बजट और सरकार की मंशा पर सवाल

सांसद संजय सिंह ने सरकार की विरोधाभासी नीतियों पर निशाना साधते हुए 16 मार्च को संसद में पारित किए गए 57,381 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजट का उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि देश में गैस की कोई कमी नहीं है, जैसा कि सरकार दावा कर रही है, तो फिर इस संकट से निपटने के लिए इतने भारी-भरकम 'इकोनॉमिक स्टेबलाइजेशन फंड' की क्या जरूरत पड़ी? उन्होंने सरकार से सीधा सवाल किया कि क्या यह बजट केवल कागजों तक सीमित रहेगा या आम आदमी को कतारों से मुक्ति भी दिलाएगा।


आप नेता ने भारत की विदेश नीति और हालिया अंतरराष्ट्रीय तनावों (जैसे अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध) का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार की गलत प्राथमिकताओं के कारण आज देश का ऊर्जा क्षेत्र खतरे में है। उन्होंने आरोप लगाया कि इजराइल का समर्थन करने और ईरान से संबंधों में तनाव के चलते महंगाई और आपूर्ति का संकट बढ़ा है, जिसका खामियाजा अब देश का आम नागरिक भुगत रहा है।


देश में LPG संकट की भयावह स्थिति (मार्च 2026)

वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का 85-90% एलपीजी आयात करता है, जो मुख्य रूप से 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के रास्ते आता है। युद्ध के कारण इस मार्ग के बाधित होने से आयात में 30% की गिरावट आई है। देश के विभिन्न राज्यों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है:

दिल्ली-NCR/UP | 500 मीटर लंबी कतारें, ₹1500 तक ब्लैक रेट।  | घरेलू उपभोक्ताओं में पैनिक, 35% औद्योगिक कटौती। 
महाराष्ट्र | कमर्शियल गैस बंद, 10,000 रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर।  | होटल उद्योग ठप, भारी बेरोजगारी का खतरा। 
गुजरात | घरेलू वेटिंग 3-5 दिन, टाटा मोटर्स जैसे प्लांट्स में 50% कट। | ऑटो सेक्टर का उत्पादन आधा रह गया, नौकरियां संकट में। 
तमिलनाडु/बंगाल | 10,000 से अधिक भोजनालय बंद, श्मशान घाट तक प्रभावित। | सामाजिक सेवाएं और खाद्य सुरक्षा बाधित। 


विश्लेषण

मार्च 2026 का यह ऊर्जा संकट भारत की ऊर्जा सुरक्षा और विदेशी आयात पर अत्यधिक निर्भरता को उजागर करता है। जहाँ एक ओर सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने और रिफाइनरियों का उत्पादन बढ़ाने जैसे कदम उठाए हैं, वहीं दूसरी ओर औद्योगिक और कमर्शियल सेक्टर की अनदेखी आर्थिक मंदी को न्योता दे रही है। संजय सिंह का हमला केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि उन लाखों परिवारों की आवाज है जो इस 'मैन-मेड' और 'ग्लोबल' संकट के बीच अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सरकार को केवल बजट पारित करने के बजाय पारदर्शी तरीके से आपूर्ति बहाल करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। #SanjaySingh #AAP #LPGShortage #ModiGovernment #EnergyCrisis #Inflation #IndiaNews #DelhiNews #GasCrisis2026 #MiddleEastConflict #EconomicCrisis #AAPHindi**
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