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देवघर के डिगरिया पहाड़ पर भीषण अग्निकांड: महुआ चुनने की परंपरा ने वन संपदा को पहुँचाया भारी नुकसान

झारखंड | देवघर जिले के प्रसिद्ध डिगरिया पहाड़ की चोटी पर स्थित सघन वन क्षेत्र में 17 मार्च 2026 की सुबह भीषण आग लग गई, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। 'पड़ताल में यह तथ्य सामने आया' कि यह आग महुआ के फूल चुनने के दौरान स्थानीय ग्रामीणों द्वारा लगाई गई थी, जो अनियंत्रित होकर पूरे पहाड़ी क्षेत्र में फैल गई। 'प्रशासनिक गलियारों में हलचल' के बीच वन विभाग की टीम ने तत्काल मोर्चा संभाला और करीब चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद इस भयावह स्थिति पर काबू पाया।

संकट की शुरुआत और प्रशासनिक सक्रियता

पहाड़ की चोटी से नीचे की ओर बढ़ती आग की लपटों ने न केवल घने जंगलों को अपनी चपेट में लिया, बल्कि कई दुर्लभ जड़ी-बूटियों और वनस्पतियों को भी खाक कर दिया। इस घटना के दौरान स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को अपूरणीय क्षति हुई है और कई छोटे वन्यजीवों के हताहत होने की गंभीर आशंका जताई गई है। वन विभाग ने फायरलाइन बनाने जैसे पारंपरिक तरीकों का उपयोग कर आग को रिहायशी इलाकों की तरफ बढ़ने से रोका, जिससे बड़ी जनहानि टल गई।

जैव-विविधता और वन्यजीवों पर गहरा प्रहार

झारखंड के आदिवासी क्षेत्रों में महुआ संग्रहण के दौरान सूखी घास जलाना एक पुरानी परंपरा रही है, लेकिन सूखे मौसम में यह अभ्यास पर्यावरण के लिए घातक साबित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की लापरवाही जैव-विविधता के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रही है, जिससे भविष्य में पर्यावरणीय असंतुलन बढ़ सकता है। प्रशासन ने अब ग्रामीणों को महुआ चुनने के सुरक्षित और वैकल्पिक तरीके अपनाने के लिए जागरूक करने का निर्णय लिया है।

परंपरा और पारिस्थितिकी के बीच का संघर्ष

विभाग ने स्थानीय निवासियों से अपील की है कि वे जंगलों में किसी भी प्रकार की ज्वलनशील वस्तु न ले जाएं और आग लगने पर तुरंत सूचना दें। विभाग ने चेतावनी दी है कि वन संपदा को नुकसान पहुँचाने वाली गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है और भविष्य में सख्त कार्रवाई की जाएगी। डिगरिया पहाड़ की यह घटना एक बार फिर मानव और प्रकृति के बीच बढ़ते संघर्ष और परंपराओं के वैज्ञानिक पुनर्विचार की आवश्यकता को रेखांकित करती है।  #Deoghar #JharkhandForest #WildlifeProtection #EnvironmentAlert #DigariyaHill #ForestFireAwareness


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