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गोरखपुर में खूनी तांडव: पूर्व पार्षद राजकुमार चौहान की दिनदहाड़े नृशंस हत्या, 20 से ज्यादा बार चाकुओं से गोदा

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद में मंगलवार की सुबह गोलियों की तड़तड़ाहट और चीख-पुकार से दहल गई। वार्ड नंबर 14, बरगदवा इलाके के निवासी और भाजपा से जुड़े पूर्व पार्षद राजकुमार चौहान की बदमाशों ने घेरकर हत्या कर दी। यह वारदात तब हुई जब वे प्रतिदिन की तरह मॉर्निंग वॉक के लिए घर से निकले थे।

दुस्साहस की पराकाष्ठा: पहले गोली फिर चाकू

घर से महज 500 मीटर की दूरी पर घात लगाए बैठे करीब आधा दर्जन हमलावरों ने राजकुमार चौहान को चारों तरफ से घेर लिया। हमलावरों ने सबसे पहले उनके सिर में गोली मारी, जिससे वे संभल नहीं पाए। इसके बाद दरिंदगी दिखाते हुए बदमाशों ने उनके सीने और चेहरे पर चाकू व धारदार हथियारों से 20 से अधिक बार वार किए।

जान बचाने के लिए लहूलुहान हालत में दौड़

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद राजकुमार चौहान ने अपनी जान बचाने के लिए करीब 300 मीटर तक भागने का प्रयास किया। लेकिन क्रूर हत्यारों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा और दोबारा हमला कर उन्हें मौत की नींद सुला दिया। हत्यारे तब तक मौके पर डटे रहे जब तक उन्हें मौत की तस्दीक नहीं हो गई।

पुलिस महकमे में हड़कंप और जांच

सूचना मिलते ही एसएसपी डॉ. कौस्तुभ भारी पुलिस बल और फॉरेंसिक टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने मौके से गोलियों के खोखे और अन्य साक्ष्य बरामद किए हैं। चिलुआताल थाना क्षेत्र में हुई इस घटना के बाद इलाके में भारी तनाव है, जिसे देखते हुए पीएसी की तैनाती कर दी गई है।

सात संदिग्ध हिरासत में, पूछताछ जारी

पुलिस प्रशासन ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक 7 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। एसएसपी के अनुसार, हत्या के पीछे पुरानी रंजिश या संपत्ति विवाद हो सकता है। राजकुमार चौहान एक सक्रिय प्रॉपर्टी डीलर भी थे, जिसकी वजह से उनके कई व्यावसायिक प्रतिद्वंद्वी भी जांच के घेरे में हैं।

सियासी गलियारों में मचा भारी बवाल

गोरखनाथ मंदिर से महज 5 किलोमीटर दूर हुई इस हत्या ने कानून-व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट कर सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यूपी में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और कानून-व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है।

परिजनों का आक्रोश और सड़क जाम

घटना के बाद राजकुमार चौहान के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। न्याय की मांग को लेकर समर्थकों ने सड़क जाम कर जमकर नारेबाजी की। पुलिस के काफी समझाने और दोषियों पर कठोर कार्रवाई के आश्वासन के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज भेजा जा सका। फोटो सोर्से, साभार

विश्लेषण

"मुख्यमंत्री के शहर में एक पूर्व जनप्रतिनिधि की इस तरह सरेआम हत्या होना पुलिसिंग की विफलता को दर्शाता है। यदि सुबह की सैर पर निकले व्यक्ति को सुरक्षा की गारंटी नहीं है, तो आम जनमानस में भय का व्याप्त होना स्वाभाविक है। पुलिस को न केवल अपराधियों को पकड़ना होगा, बल्कि ऐसी नजीर पेश करनी होगी जिससे भविष्य में ऐसी दुस्साहसिक वारदातों पर लगाम लग सके। राजनीतिक संरक्षण और जमीनी रंजिश के गठजोड़ को तोड़ना अब प्रशासन के लिए अनिवार्य चुनौती बन गया है।"  

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