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महाराष्ट्र विधानसभा में 'धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026' पेश: जबरन धर्मांतरण और उत्तराधिकार पर सख्त प्रावधान

महाराष्ट्र   महाराष्ट्र विधानसभा के वर्तमान बजट सत्र के दौरान 'धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026' पेश किए जाने से प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। इस प्रस्तावित कानून का प्राथमिक उद्देश्य बल, छल, प्रलोभन या किसी भी प्रकार के अनुचित दबाव के माध्यम से कराए जाने वाले धर्मांतरण पर पूर्णतः अंकुश लगाना है। सरकार का तर्क है कि यह बिल न केवल अवैध धर्म परिवर्तन को रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह उन सामाजिक विसंगतियों को भी समाप्त करने का प्रयास करता है जो अक्सर कपटपूर्ण विवाहों के बाद उत्पन्न होती हैं।


धर्मांतरण विरोधी कानून का नया स्वरूप

पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है कि इस विधेयक में धर्मांतरण से उत्पन्न संतानों के अधिकारों को लेकर अभूतपूर्व प्रावधान किए गए हैं। नए नियमों के अनुसार, जबरन धर्मांतरण के आधार पर हुई शादी से पैदा होने वाला बच्चा अपनी माता के मूल धर्म का ही माना जाएगा, यानी वह धर्म जिसे माता विवाह से पूर्व मानती थी। इसके साथ ही, विधेयक यह सुनिश्चित करता है कि ऐसे बच्चों को माता-पिता दोनों की संपत्ति में कानूनी उत्तराधिकार प्राप्त हो और उन्हें उचित भरण-पोषण का अधिकार भी मिले, जो सामाजिक न्याय की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।


बच्चों के अधिकारों और उत्तराधिकार पर ऐतिहासिक निर्णय

प्रक्रियात्मक पहलुओं पर गौर करें तो अब किसी भी व्यक्ति के लिए धर्म परिवर्तन करना सरल नहीं होगा; उसे इसके लिए कम से कम 60 दिन पूर्व जिला मजिस्ट्रेट को लिखित सूचना देनी अनिवार्य होगी। इस सूचना के उपरांत प्रशासन यह गहन जांच करेगा कि क्या यह निर्णय पूर्णतः स्वेच्छा से लिया गया है या किसी प्रलोभन का परिणाम है। यदि नियमों का उल्लंघन कर धर्मांतरण किया जाता है, तो उसे पूर्णतः अवैध घोषित कर दिया जाएगा। जिला प्रशासन को यह अधिकार दिया गया है कि वह किसी भी संदिग्ध मामले की गहराई से जांच कर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करे।


प्रशासनिक निगरानी और अनिवार्य सूचना के नियम

सजा के प्रावधानों को अत्यंत सख्त बनाते हुए विधेयक में 7 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव रखा गया है। यदि पीड़ित महिला, नाबालिग या अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग से हो, तो यह जुर्माना 5 लाख रुपये तक बढ़ सकता है। सामूहिक धर्मांतरण यानी 'मास कन्वर्जन' के मामलों में 10 साल तक के कारावास और 7 लाख रुपये जुर्माने का कड़ा प्रावधान है। साथ ही, जबरन धर्मांतरण के शिकार व्यक्तियों के पुनर्वास और उनकी सुरक्षा के लिए पुलिस को त्वरित शिकायत दर्ज करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।  #MaharashtraAssembly #AntiConversionBill #SocialJustice #LegalReform #MaharashtraNews

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