ईरान-अमेरिका युद्ध: शांति प्रस्ताव ठुकराया, बढ़ी तबाही

शांति की कोशिश बेकार, बढ़ा युद्ध का बुखार

पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग ने अब एक ऐसा भयावह रूप ले लिया है जहाँ शांति की हर किरण धुंधली पड़ती दिखाई दे रही है। जो युद्ध कभी जनता को आजादी दिलाने के नाम पर शुरू हुआ था आज वही जनता अपनी बुनियादी सुरक्षा के लिए तरस रही है। मिस्र, पाकिस्तान और तुर्किये जैसे देशों ने बीच-बचाव कर युद्ध रोकने की एक बड़ी कोशिश की थी लेकिन उनके साझा प्रस्ताव को ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है। वर्तमान स्थिति यह है कि दोनों देशों के बीच संवाद के सारे रास्ते बंद होते जा रहे हैं और युद्ध के मैदान में बारूद की गंध और भी तेज हो गई है।

शर्तों पर तकरार, मँडरा रही हार

मध्यस्थों द्वारा भेजे गए मसौदे में 45 दिनों के अस्थायी युद्धविराम का प्रस्ताव रखा गया था जिसे रविवार की रात ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची को सौंपा गया था। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों को वार्ता की मेज पर लाना था ताकि होर्मुज की खाड़ी को फिर से खोला जा सके और समुद्री व्यापार सुचारू हो सके। हालांकि ईरान ने इस प्रस्ताव को यह कहकर ठुकरा दिया कि अमेरिका स्थायी शांति के लिए गंभीर नहीं है और वह केवल वक्त काटना चाहता है। अमेरिका के दूत स्टीव विटकॉफ को भी यह प्रस्ताव मिला है मगर उनकी तरफ से अभी कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है।

होर्मुज का ताला, मंजर बड़ा काला

युद्धविराम के इस मसौदे को दो चरणों में लागू करने की योजना बनाई गई थी जिसमें पहले चरण में गोलाबारी बंद कर बातचीत का माहौल तैयार करना था। दूसरे चरण में सबसे महत्वपूर्ण शर्त स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलना और ईरान के समृद्ध यूयूरेनियम के भंडार को देश से बाहर भेजना तय किया गया था। ईरान का स्पष्ट मानना है कि जब तक उसे पिछली वित्तीय क्षति की पूर्ति नहीं की जाती और भविष्य में हमले न होने का लिखित आश्वासन नहीं मिलता तब तक वह पीछे नहीं हटेगा। इस जिद्द ने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संगठनों की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि होर्मुज के बिना तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी।

ट्रंप का प्रहार, ईरान भी तैयार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब पहले से कहीं अधिक आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं और उन्होंने ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की खुली धमकी दी है। ट्रंप ने इस सप्ताह स्पष्ट किया कि यदि समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान के प्रमुख बिजली संयंत्रों और रणनीतिक पुलों पर भारी बमबारी करने से पीछे नहीं हटेगा। दूसरी ओर ईरान के रक्षा अधिकारियों ने भी पलटवार करते हुए कहा है कि वे अमेरिका के किसी भी जमीनी हमले का इंतजार कर रहे हैं ताकि उसे कड़ा सबक सिखाया जा सके। युद्ध के 24वें दिन दोनों शक्तियों के बीच बढ़ती यह तल्खी एक बड़े क्षेत्रीय विध्वंस की ओर इशारा कर रही है।

जनता बेहाल, भविष्य पर सवाल

इस भीषण संघर्ष के बीच आम नागरिक सबसे बड़े शिकार बन रहे हैं जिनकी रातें धमाकों के साये में बीत रही हैं और दिन दाने-दाने की किल्लत में कट रहे हैं। वैश्विक समुदाय को डर है कि यदि 45 दिनों का यह अस्थायी समझौता भी लागू नहीं होता है तो आने वाले दिन और भी भयावह हो सकते हैं। यूरेनियम संवर्धन और मिसाइल तैनाती के इस खेल में मानवता कहीं पीछे छूट गई है और कूटनीति के मेज पर बिछी बिसात अब खूनी खेल में तब्दील हो रही है। अंततः यह सवाल खड़ा होता है कि क्या यह अहंकार की लड़ाई पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की आग में धकेलने का कारण बनेगी। फोटो सोर्स: साभार #IranUSWar #MiddleEastCrisis #GlobalStability #PeaceTalks #DonaldTrump #Hamaraprayas 

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